मेहनत, अनुशासन और प्रतिभा का स्वर्णिम संगम: सरस्वती देवी महाविद्यालय की छात्राओं ने रचा कीर्तिमान, दीक्षोत्सव में गूंजा स्वर्णिम शंखनाद

  • 👉 दो बेटियों ने जीत लिए 8 गोल्ड मेडल, सुष्मिता के सिर सजे 7 स्वर्ण—साक्षी ने भी गणित में मारी बाजी

  • 👉 गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षोत्सव में चमका महाविद्यालय का नाम, अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ने लिखी सफलता की नई कहानी

डाक टाइम्स न्यूज खड्डा। जब मेहनत को अनुशासन का साथ मिले, प्रतिभा को सही दिशा मिले और गुरुजनों का मार्गदर्शन निरंतर मिलता रहे, तो सफलता की चमक दूर तक दिखाई देती है। कुछ ऐसा ही गौरवपूर्ण दृश्य देखने को मिला दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर के 45वें दीक्षांत समारोह ‘दीक्षोत्सव’ में, जहां सरस्वती देवी महाविद्यालय, खड्डा की दो मेधावी छात्राओं ने एक साथ आठ स्वर्ण पदक जीतकर महाविद्यालय ही नहीं, बल्कि पूरे खड्डा क्षेत्र को गौरवान्वित कर दिया। महाविद्यालय की एम.ए. हिंदी की छात्रा कु. सुष्मिता गुप्ता ने अपनी असाधारण प्रतिभा और शानदार शैक्षणिक प्रदर्शन के दम पर सात स्वर्ण पदक अपने नाम कर महाविद्यालय की उपलब्धियों में स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया। वहीं बी.एस-सी. गणित वर्ग की छात्रा कु. साक्षी मिश्रा ने विश्वविद्यालय एवं उससे संबद्ध महाविद्यालयों के बीच उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए एक स्वर्ण पदक हासिल कर अपनी प्रतिभा का परचम लहराया।

राज्यपाल के हाथों मिला सम्मान, गौरव से भर उठा महाविद्यालय

दीक्षांत समारोह के भव्य मंच पर दोनों मेधावी छात्राओं को राज्यपाल माननीया आनंदीबेन पटेल ने उत्तरीय एवं स्वर्ण पदक पहनाकर सम्मानित किया। यह क्षण छात्राओं के लिए जितना गौरवपूर्ण रहा, उतना ही सरस्वती देवी महाविद्यालय के प्रबंधतंत्र, शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों के लिए भी गर्व का विषय बना। विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित मंच पर खड्डा के महाविद्यालय की प्रतिभाओं का इस तरह सम्मानित होना क्षेत्र में उच्च शिक्षा की बढ़ती गुणवत्ता और विद्यार्थियों की बढ़ती शैक्षणिक क्षमता का भी परिचायक माना जा रहा है।

सिर्फ पढ़ाई नहीं, अनुशासन को बनाया सफलता का मंत्र

सरस्वती देवी महाविद्यालय की इस उपलब्धि के पीछे केवल पाठ्यक्रम की पढ़ाई नहीं, बल्कि अनुशासन, नियमित अध्ययन, संस्कार, कठिन परिश्रम और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक मार्गदर्शन की मजबूत व्यवस्था दिखाई देती है। महाविद्यालय में विद्यार्थियों को बेहतर अंक प्राप्त करने के साथ-साथ समय का सदुपयोग, नियमित अध्ययन, लक्ष्य के प्रति समर्पण और अनुशासित जीवनशैली के लिए प्रेरित किया जाता है। यही वजह है कि महाविद्यालय की प्रतिभाएं विश्वविद्यालय स्तर की प्रतिस्पर्धा में भी अपनी अलग पहचान बनाने में सफल हो रही हैं।

प्राचार्य डॉ. दीपक कुमार मिश्र के नेतृत्व में सफलता की नई उड़ान

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. दीपक कुमार मिश्र ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर दोनों छात्राओं को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता छात्राओं की प्रतिभा, परिश्रम, लगन और अनुशासित अध्ययन का परिणाम है।उन्होंने कहा कि महाविद्यालय का प्रयास है कि विद्यार्थियों को ऐसा शैक्षणिक वातावरण मिले, जहां वे ज्ञान के साथ अनुशासन और संस्कार भी प्राप्त करें तथा जीवन में ऊंचे लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें हासिल करने का आत्मविश्वास विकसित करें। प्राचार्य ने दोनों छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनकी सफलता महाविद्यालय के अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

प्रबंध निदेशक पवन दूबे की दूरदर्शी सोच को मिली सफलता की चमक

महाविद्यालय के प्रबंध निदेशक पवन दूबे ने दोनों छात्राओं की उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता महाविद्यालय की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि प्रबंधन का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक ज्ञान तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें अनुशासित, संस्कारवान, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करना है। उन्होंने दोनों स्वर्ण पदक विजेता छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि वे भविष्य में भी सफलता की नई ऊंचाइयां हासिल करेंगी।

आठ स्वर्ण पदकों ने बढ़ाया महाविद्यालय का मान

एक ही दीक्षांत समारोह में महाविद्यालय की दो छात्राओं द्वारा कुल आठ स्वर्ण पदक हासिल किए जाने से सरस्वती देवी महाविद्यालय परिवार में खुशी की लहर है। प्रबंधतंत्र, प्राचार्य, समस्त प्राध्यापकगण, शिक्षणेत्तर कर्मचारी एवं विद्यार्थियों ने दोनों छात्राओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। महाविद्यालय परिवार का कहना है कि यह उपलब्धि आने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनेगी और उन्हें भी उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करेगी।

एक उपलब्धि, कई संदेश

सुष्मिता गुप्ता और साक्षी मिश्रा की यह उपलब्धि सिर्फ आठ स्वर्ण पदकों की कहानी नहीं, बल्कि प्रतिभा, अनुशासन, परिश्रम और बेहतर मार्गदर्शन के शानदार संगम की कहानी है। सरस्वती देवी महाविद्यालय, खड्डा ने दीक्षोत्सव के मंच से यह संदेश दिया है कि छोटे शहर और ग्रामीण अंचल की प्रतिभाओं में भी बड़े सपने देखने और उन्हें स्वर्णिम सफलता में बदलने की पूरी क्षमता है। खड्डा की इन स्वर्णिम बेटियों ने विश्वविद्यालय के मंच पर जो परचम लहराया है, उसकी चमक निश्चित रूप से लंबे समय तक महाविद्यालय और पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित करती रहेगी।