कजरी की तान से गूंजा गंभीरपुर, लोक रंग में सराबोर हुआ कप्तानगंज

लोकमंजरी के कजरी उत्सव में बिखरी भोजपुरी संस्कृति की खुशबू, लोकगीतों पर झूमे श्रोता; कलाकारों को मिला सम्मान

DAktimes News कप्तानगंज, कुशीनगर। सावन की रिमझिम फुहारों, भोजपुरी लोकगीतों की मधुर तान और पारंपरिक लोकनृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों के बीच गंभीरपुर मंदिर परिसर में रविवार को लोक संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। भोजपुरी लोकगीत, लोकनृत्य एवं लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन को समर्पित संस्था ‘लोकमंजरी’ की ओर से आयोजित कजरी उत्सव में कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि पूरा परिसर भोजपुरी लोक रंग में रंग गया। कार्यक्रम का उद्घाटन दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री अतुल सिंह ने किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में अंतरराष्ट्रीय लोक गायक डॉ. राकेश श्रीवास्तव, जेपी इंटरमीडिएट कॉलेज के प्रधानाचार्य राम प्रसाद, लोकमंजरी के अध्यक्ष विश्व मित्र भट्ट तथा गंभीरपुर के ग्राम प्रधान अंबिका गुप्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन विश्व भोजपुरी सम्मेलन कुशीनगर एवं विमर्श साहित्यिक सामाजिक सेवा संस्था के अध्यक्ष आरके भट्ट ने किया। 

दीप प्रज्ज्वलन से हुई शुरुआत, कजरी की तान ने बांधा समां

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, शिव स्तुति, मंगलाचरण और मनमोहक नृत्य प्रस्तुति के साथ हुआ। शांभवी, अंजलि, अनुष्का और अमृता ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिनंदन किया। इसके बाद परी, ज्योति, नंदिनी, रोशनी और अंशिका ने पारंपरिक कजरी गीतों की प्रस्तुति देकर वातावरण को लोक संस्कृति के रंग में सराबोर कर दिया। जेपी इंटरमीडिएट कॉलेज की छात्राओं ने भी पारंपरिक कजरी गीत प्रस्तुत कर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। छात्राओं की प्रस्तुतियों को दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से खूब सराहा।

एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों ने जीता दर्शकों का दिल

कार्यक्रम में तेज सिंह, काजल, देवानंद, अनामिका गुप्ता, आयुषी, मानसी सिंह, आकाश पांडेय, सुभाष, सुहाना, ज्योति, जितेंद्र शर्मा, मंटू पाठक और साक्षी गुप्ता ने एक से बढ़कर एक पारंपरिक कजरी गीत प्रस्तुत किए। लोकगीतों की मिठास और कलाकारों की शानदार गायकी ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं डॉ. राकेश शर्मा, प्रभाकर शुक्ला तथा लोकमंजरी के उपाध्यक्ष रामदरश शर्मा ने भी पारंपरिक कजरी गीतों की शानदार प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।

‘लोकगीत हमारी पीढ़ियों की स्मृति और जीवन दर्शन’—अतुल सिंह

मुख्य अतिथि दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री अतुल सिंह ने कहा कि लोकगीत और लोक परंपराएं किसी समाज की केवल सांस्कृतिक पहचान नहीं होतीं, बल्कि वे उसकी पीढ़ियों की स्मृतियों, अनुभवों और जीवन दर्शन को अपने भीतर संजोए रखती हैं। कजरी जैसे पारंपरिक गीतों को मंच देना अपनी जड़ों को मजबूत करने जैसा है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के बढ़ते प्रभाव के बीच अनेक लोक परंपराएं धीरे-धीरे विलुप्त होने के कगार पर हैं। ऐसे में लोक संस्कृति से जुड़े आयोजनों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। लोक संस्कृति को केवल मंचों तक सीमित न रखकर नई पीढ़ी की शिक्षा और संस्कारों से जोड़ना होगा, तभी भोजपुरी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रूप से आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच सकेगी।

नई पीढ़ी को लोक संस्कृति से जोड़ना जरूरी—राम प्रसाद

जेपी इंटरमीडिएट कॉलेज के प्रधानाचार्य राम प्रसाद ने कहा कि लोकगीत हमारी मिट्टी, भाषा और सामाजिक परंपराओं का जीवंत दस्तावेज हैं। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ अपनी लोक संस्कृति से जोड़ना भी हमारी जिम्मेदारी है। विद्यालय की छात्राओं द्वारा कजरी की प्रस्तुति इस बात का प्रमाण है कि उचित अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर नई पीढ़ी अपनी लोक विरासत को पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ा सकती है।

लोक प्रतिभाओं को मंच देना लोकमंजरी का उद्देश्य—विश्व मित्र भट्ट

लोकमंजरी के अध्यक्ष विश्व मित्र भट्ट ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि संस्था का मुख्य उद्देश्य भोजपुरी लोकगीत, लोकनृत्य और लोक परंपराओं का संरक्षण करते हुए उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। संस्था आने वाले समय में लोक संस्कृति से जुड़े कलाकारों को प्रशिक्षण देने और उन्हें उचित मंच उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास करती रहेगी। कोषाध्यक्ष डॉ. चंदन गोंड ने कहा कि कजरी महज एक गीत नहीं, बल्कि भोजपुरी समाज के सुख-दुख, प्रेम, विरह और उत्सव की भावनाओं की जीवंत अभिव्यक्ति है। लोक कलाकारों को मंच और सम्मान देना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। लोकमंजरी ऐसे आयोजनों के माध्यम से गांवों में बिखरी लोक प्रतिभाओं को सामने लाने और उन्हें नई पीढ़ी से जोड़ने का कार्य कर रही है।

लोक कलाकारों का हुआ सम्मान

कार्यक्रम के दौरान डॉ. राकेश श्रीवास्तव एवं अनिरुद्ध प्रसाद का विशेष सम्मान किया गया। इसके साथ ही गंभीरपुर के पारंपरिक होली गीतों को जीवंत रखने वाले लोक कलाकारों को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में संगत कलाकार प्रेम नारायण पांडेय, अशोक वाल्मीकि, संत राज, यशवंत और अमित कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजकों ने बताया कि सभी कलाकारों को कार्यशाला आयोजित कर अंतरराष्ट्रीय लोक गायक रामदास शर्मा द्वारा प्रशिक्षण दिया गया था।

कार्यक्रम में मोहन पांडेय, फरेन्द्र पांडेय, आफताब आलम, दिनेश शर्मा, अमरजीत मिश्रा एडवोकेट, जयराज सिंह, इरशाद, हरिप्रिय पाठक, राम ज्ञान गोंड, रामदरश सिंह, सुरेंद्र गोंड, आशुतोष मिश्रा, मंटू पाठक, विश्वंभर प्रसाद, राधे कृष्ण सिंह, रामानंद यादव, मुस्ताक अहमद, दिलीप साहनी, सरवन कुमार, परसन गोंड, गौतम सिंह, मानवेन्द्र पाठक सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे। कजरी की मधुर तान और भोजपुरी लोक संस्कृति की जीवंत प्रस्तुतियों ने गंभीरपुर की धरती पर ऐसा रंग जमाया कि देर तक पूरा परिसर तालियों और लोकगीतों की गूंज से गुलजार रहा।























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