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“बेहतर इलाज के लिए ले जाने तक नहीं दिया मौका” — परिजनों ने सीएमओ से की जांच और कार्रवाई की मांग
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Daktimes News कप्तानगंज/कुशीनगर। कप्तानगंज स्थित सच्चिदानंद हॉस्पिटल में प्रसव के बाद नवजात बच्ची की मौत का मामला सामने आया है। बच्ची के परिजनों ने अस्पताल के चिकित्सकों और स्टाफ पर घोर लापरवाही तथा इलाज के नाम पर परिजनों को गुमराह करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर पत्रकार संदीप मिश्रा के छोटे भाई अश्वनी मिश्रा ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी, कुशीनगर को प्रार्थना पत्र देकर पूरे प्रकरण की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। प्रार्थना पत्र के मुताबिक, रामकोला थाना क्षेत्र के अभडरिया निवासी पत्रकार संदीप मिश्रा के छोटे भाई अश्वनी मिश्रा की पत्नी मीनाक्षी को प्रसव पीड़ा होने पर 19 अगस्त 2026 को सच्चिदानंद हॉस्पिटल, कप्तानगंज में भर्ती कराया था। अगले दिन 20 अगस्त को सामान्य प्रसव के दौरान बच्ची का जन्म हुआ।
परिजनों का दावा है कि जन्म के समय बच्ची स्वस्थ थी। आरोप है कि प्रसव के करीब एक दिन बाद अस्पताल की ओर से परिजनों को बताया गया कि बच्ची को हल्का पीलिया है और उसे आईसीयू में रखना पड़ेगा। परिजनों का कहना है कि उन्होंने बच्ची को छुट्टी देकर किसी विशेषज्ञ बाल रोग चिकित्सक से इलाज कराने की इच्छा जताई, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में कथित तौर पर पर्याप्त विशेषज्ञ बाल रोग चिकित्सक की व्यवस्था नहीं होने के बावजूद बच्ची को वहीं भर्ती रखा गया। उनका कहना है कि यदि बच्ची की हालत गंभीर थी तो अस्पताल प्रशासन को तत्काल किसी उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर करना चाहिए था। सबसे गंभीर आरोप यह है कि 24 अगस्त की सुबह अचानक परिजनों को बच्ची की मौत की सूचना दी गई। चार दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद नवजात की मौत की खबर मिलने से परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने उपचार की पूरी प्रक्रिया और अस्पताल की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।
चार दिन इलाज किस डॉक्टर ने किया? मांगी विशेषज्ञ की पूरी जानकारी
प्रार्थना पत्र में परिजनों ने मांग की है कि 19 से 24 अगस्त तक बच्ची का इलाज किन-किन चिकित्सकों द्वारा किया गया, संबंधित डॉक्टरों के नाम, उनकी शैक्षिक योग्यता और विशेषज्ञता क्या थी, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए। साथ ही उपचार से संबंधित सभी मेडिकल रिकॉर्ड की जांच कराई जाए। परिजनों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच, उपचार में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित चिकित्सकों और स्टाफ के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तथा अस्पताल की चिकित्सकीय व्यवस्थाओं की भी जांच कराने की मांग की है। अब बड़ा सवाल यह है कि यदि नवजात की हालत वास्तव में गंभीर थी तो उसे समय रहते विशेषज्ञ बाल रोग चिकित्सक अथवा उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर क्यों नहीं किया गया? बच्ची की मौत की वास्तविक वजह क्या थी और चार दिनों के उपचार के दौरान उसकी निगरानी किस चिकित्सक ने की? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
मामले की जानकारी मिलते ही पहुंचे डिप्टी सीएमओ
घटना की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग भी सक्रिय हुआ। डिप्टी सीएमओ ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का दौरा किया और मामले की जानकारी ली। उन्होंने अस्पताल परिसर में मौजूद परिजनों से बातचीत कर घटना से जुड़े तथ्यों की जानकारी हासिल की। परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के सामने सवाल उठाया कि बच्ची का चार दिनों तक इलाज किस चिकित्सक ने किया, संबंधित डॉक्टर की विशेषज्ञता और डिग्री क्या है तथा उपचार के दौरान कौन-कौन सी चिकित्सकीय प्रक्रियाएं अपनाई गईं। साथ ही उन्होंने बच्ची की मेडिकल रिपोर्ट और उपचार से संबंधित दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की। फिलहाल मामला जांच के घेरे में है। परिजनों की ओर से लगाए गए लापरवाही के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग की जांच में नवजात की मौत की वास्तविक वजह क्या सामने आती है और यदि चिकित्सकीय लापरवाही प्रमाणित होती है तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई की जाती है।






